16वां जी-20 शिखर सम्मेलन 2021 इटली में संपन्न : पीएम मोदी ने भाग लिया

विश्व की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश के नेताओं की दो दिवसीय (30-31 अक्टूबर 2021) 16वां जी-20 शिखर सम्मेलन (G-20 Summit) इटली के रोम शहर में आयोजित गया। इस बार 16 वें जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी इटली कर रहा है। इस शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन कोरोना और अर्थव्यवस्था पर चर्चा होगी।

इस शिखर सम्मेलन में भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाग लिया। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 8वीं जी-20 बैठक है। इससे पहले 7 बार इस सम्मेलन में भाग ले चुके हैं।

इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी ने जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य देशों के सभी नेताओं का स्वागत किया।

कोरोना महामारी के चलते दो साल में पहली बार यह शिखर सम्मेलन प्रत्यक्ष रूप से (फेस-टू-फेस) आयोजित हो रहा। हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा और मेक्सिको के राष्ट्रपति एंद्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेदोर रोम नहीं पहुंचे हैं।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 30 अक्टूबर को पेइचिंग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 16वें जी-20 शिखर सम्मेलन के प्रथम चरण के अधिवेशन में भाग लिया और भाषण दिया।

• पीयूष गोयल जी-20 सम्मेलन में भारत के मुख्य वार्ताकार ‘शेरपा’ थे

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जी-20 सम्मेलन में भारत के मुख्य वार्ताकार ‘शेरपा’ थे।

शेरपा जी-20 सदस्य देशों के नेताओं का प्रतिनिधि होता है‚ जो सम्मेलन के एजेंडे के बीच समन्वय बनाता है। साथ ही सदस्य देशों के साथ मिलकर आर्थिक‚ राजनीतिक और वैश्विक चर्चा के एजेंडे को लेकर बात करता है।

श्री पियूष गोयल जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की भागीदारी की अंतिम तैयारियों की निगरानी के लिए तीन दिन पहले ही रोम पहुंच गए थे। 27-29 अक्टूबर 2021 तक जी-20 शेरपा बैठक में भाग लिया।

शेरपा की बैठक का एजेंडा रोम घोषणापत्र को अंतिम रूप देना है जिसे जी-20 सम्मेलन में नेताओं द्वारा अपनाया जाएगा।

• सम्मेलन की थीम 'जनता, पृथ्वी और समृद्धि' (पीपल, प्लेनेट, प्रास्पैरिटी)

इटली की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन 'जनता, पृथ्वी और समृद्धि' (पीपल, प्लेनेट, प्रास्पैरिटी) थीम पर आधारित है। यह थीम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास के एजेंडा 2030 पर आधारित है।

‘लोग, ग्रह, समृद्धि’ की थीम के तहत ‘‘महामारी से रिकवरी तथा वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने, आर्थिक सुधार और अनुकूलतता, जलवायु परिवर्तन एवं ऊर्जा पारगमन और टिकाऊ विकास एवं खाद्य सुरक्षा’’ पर फोकस किया गया है।

जी-20 की बैठक का विषय वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के साथ-साथ सतत विकास है।

• 17वां जी-20 शिखर सम्मेलन 2022 में बाली (इंडोनेशिया) में आयोजित होगा

आगामी 17वां जी-20 शिखर सम्मेलन 2022 में इंडोनेशिया के बाली शहर में आयोजित किया जाएगा।

इंडोनेशिया का राष्ट्रपति पद 1 दिसंबर 2021 से शुरू होकर 2022 की चौथी तिमाही में शिखर सम्मेलन शुरू होने तक होगा। इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति जोको विडोडो द्वारा 17वें जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी इतालवी प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी से रोम शिखर सम्मेलन सम्पन्न होने पर लेंगे।

भारत 1 दिसंबर‚ 2022 से G-20 की अध्यक्षता करेगा। वर्ष 2023 में पहली बार G-20 लीडर्स समिट का आयोजन भारत में होगा। इस वर्ष दिसंबर में ट्रोइका में प्रवेश करेगा तथा विकासशील देशों और जी-20 फोरम में उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं के मुद्दों तथा चिंताओं पर नेतृत्व करेगा। वर्ष 1999 में G-20 की स्थापना के बाद से भारत इसका सदस्य रहा है।

ध्यातव्य रहे 15वां जी-20 शिखर सम्मेलन मार्च 2020 में सऊदी अरब की मेजबानी में कोरोना महामारी के चलते वर्चुअली तरीके से आयोजित किया गया। 14वें जी-20 सम्मेलन का आयोजन 2019 में जापान के ओसाका में प्रत्यक्ष रूप से आयोजित हुआ था।

• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सम्मेलन में शिरकत की मुख्य बातें

👉 पीएम मोदी ने वेटिकन सिटी (रोम) में पोप फ्रांसिस से भी मुलाकात की तथा पोप फ्रांसिस को भारत आने का न्योता दिया। जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों और गरीबी को दूर करने पर चर्चा हुई। आखिरी पोप की यात्रा 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हुई और पोप जॉन पॉल द्वितीय भारत आए थे।

👉 29 अक्टूबर 2021 को इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी से भी भेंट की। यह उनकी पहली व्यक्तिगत भेंट थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैश्विक महामारी के बीच जी-20 की सफलतापूर्वक मेजबानी करने के लिए प्रधानमंत्री ड्रैगी को बधाई दी।

जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न हुई चुनौतियों और इस संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा मिल-जुलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन में सुधार की दिशा में भारत द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए विकसित देशों की जलवायु वित्तपोषण प्रतिबद्धताओं के प्रति विकासशील देशों की चिंताओं का भी उल्लेख किया।

अफगानिस्तान और हिंद-प्रशांत सहित वर्तमान के वैश्विक और क्षेत्रीय विकास पर भी विचारों को साझा किया। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ के बहुआयामी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिल-जुलकर कार्य करने की अपनी इच्छा प्रकट की।

नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति प्रदान करने के लिए, भारत और इटली ने ऊर्जा पारागमन पर एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा करते हुए एक संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया और व्यापक स्तर की हरित गलियारा परियोजनाओं, स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण समाधान, गैस परिवहन, एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन (अपशिष्ट से धन), हरित हाइड्रोजन का विकास और परिनियोजन एवं जैव-ईंधन को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्रों में भागीदारी का पता लगाने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान भारत और इटली ने कपड़ा सहयोग के संबंध में भी एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के प्रधानमंत्री ड्रैगी को अतिशीघ्र भारत की आधिकारिक यात्रा पर आने का निमंत्रण भी दिया।

• 16 वें जी-20 शिखर सम्मेलन 2021 की वार्ता के मुख्य बिंदु

👉 जलवायु परिवर्तन, कोरोना महामारी और इसके कारण अर्थव्यवस्थाओं को हुए नुकसान पर चर्चा की गई। इस सम्मेलन के एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 महामारी, आर्थिक सुधार और वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट कर दर पर चर्चा शामिल है। उद्घाटन सत्र वैश्विक स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रहा।

👉 2021 के अंत तक ऋण सेवा निलंबन पहल को विस्तारित करने पर सहमति जताई है और इसके द्वारा दुनिया भर में जरुरतमंद और निर्बल लोगों को कुछ राहत प्राप्त हो सकेगी।

👉 सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि जी -20 नेताओं के लिए विकासशील देशों के साथ ‘अविश्वास के खतरनाक स्तर’ पर काबू पाना एक चुनौती है।

महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने जलवायु परिवर्तन संबंधी मामलों को लेकर कहा, ‘आपदाएं मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के बिना असंभव होतीं है।'

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक वैश्विक टीकाकरण योजना में बाधा डालने के लिए भू-राजनीतिक विभाजन को भी दोषी ठहराया।

गुतारेस ने वैक्सीन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केवल 5 प्रतिशत अफ्रीकी लोगों कोक्षपूरी तरह से वैक्सीन लगाई गई है जबकि अमीर देशों में लोगों को वैक्सीन की तीसरी खुराक मिल रही है।

👉 ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक उष्णता) की चिंताओं के बीच जी-20 देश वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री घटाने पर सहमत हो गए हैं।

• जी-20 जलवायु जोखिम एटलस

हाल ही में ‘यूरो-मेडिटेरेनियन सेंटर ऑन क्लाइमेट चेंज’ (CMCC) ने ‘G-20 जलवायु जोखिम एटलस’ नामक एक रिपोर्ट में बताया है कि जी-20 देश, जिसमें अमेरिका, यूरोपीय देश और ऑस्ट्रेलिया जैसे सर्वाधिक संपन्न देश शामिल हैं। आगामी वर्षों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को अधिक सहन करेंगे।

जी-20 देशों में जलवायु परिदृश्य, सूचना, डेटा और भविष्य में जलवायु परिवर्तन संबंधी जानकारी प्रदान करने वाला यह पहली रिपोर्ट है। यह रिपोर्ट अक्टूबर 2021 के अंत में रोम (इटली) में 16वें जी-20 शिखर सम्मेलन से दो दिन पहले आई है।

16th G-20 Summit Italy

• जी-20 के बारे में

जी-20 का अर्थ Group of 20 है, अर्थात् इस ग्रुप या समूह में 20 देश शामिल हैं। या यूं कहें 19 देश + यूरोपियन यूनियन तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जी-20 एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समूह है‚ जो विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ को एक साथ मंच पर लाता है। जी-20 देश विश्व की 2/3 (60 प्रतिशत) जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यूरोपियन यूनियन और ये देश हैं शामिल

इन 20 देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनियन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत शामिल है। हर वर्ष शिखर सम्मेलन में स्पेन को गैर-स्थायी सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाता है।

1975 में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई मुद्दों को लेकर विश्व के 7 देशों (ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका) ने जी-7 नामक एक समूह का गठन किया। जी-7 समूह के सदस्य देशों ने 1999 में जी-20 का गठन किया। इसमें 19 देश + यूरोपिय संघ शामिल है। विकसित और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था के सहयोग से इसे स्थापित किया गया था।

वर्ष 2008 के बाद से जी-20 देशों के नेताओं की हर साल बैठक आयोजित की जाती है। जबकि इन राष्ट्रों के वित्त मंत्री और केन्द्रीय बैंक गवर्नर साल में दो बार बैठक करते हैं, जिसमें विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेते हैं। इसमें शामिल देश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 75 % और विश्व के कुल GDP में लगभग 80 % की हिस्सेदारी रखते हैं।

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