मोदी की पंचामृत विदेश नीति | भारतीय विदेश नीति के नए आयाम

 • मोदी की विदेश नीति से संबंधित पंचामृत सिद्धांत क्या है

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच मुख्य सिद्धांत सूत्र सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा और सभ्यता एवं संस्कृति को भारतीय विदेश नीति के आधार स्तंभ के तौर पर पेश किया है। यह सिद्धांत या सूत्र नेहरू और अन्य दूसरे गुटनिरपेक्ष देशों के नेताओं के विचारधाराओं को अलग करती है। ध्यान रहे कि 1954 में नेहरू और अन्य देशों के नेताओं ने पंचशील सिद्धांत को विदेश नीति का मुख्य आधार स्तंभ बनाया था।
 पंचामृत नेहरू के पंचशील सिद्धांतों का नया स्वरूप और विस्तार रूप ही है। इसे विकल्प के तौर पर नहीं देखा जा सकता। क्योंकि भारत की विदेश नीति मूल रूप से अभी भी पंचशील सिद्धांतों पर ही आधारित है। पंचामृत एवं पंचशील दोनों ही नीतियां परस्पर समान विकास एवं शांतिपूर्ण सह अस्तित्व पर आधारित है। नेहरू और मोदी की विदेश नीति में समानता यह है कि दोनों ने ही विदेश नीति में व्यक्तिगत संबंधों को ज्यादा महत्व दिया है।
पंचामृत और पंचशील के सिद्धांत आपस में समानता लिए हुए हैं। पंचामृत के सिद्धांतों में सुरक्षा और समृद्धि (आर्थिक मजबूती) प्रमुख बिंदु है। पंचामृत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विदेश नीति से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा और सभ्यता एवं संस्कृति को विदेश नीति का आधार स्तंभ मनाया गया है।
पंचामृत विदेश नीति में मुख्य रूप से 'सॉफ्ट पावर' के तत्वों को शामिल किया गया है। पड़ोसी एवं एशिया केंद्रित विदेश नीति के दायरे से बाहर निकलकर वैश्विक लक्ष्य की ओर केंद्रित होती है।
  नई वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नई विदेश नीति की आवश्यकता होती है इसे पंचामृत पूरा करती है। नए वैश्विक वातावरण के मध्यनजर भौगोलिक-आर्थिक संबंधों के साथ यह नीति अमूर्त संबंधों को भी दृढ़ करने पर बल देती है।

• मोदी काल में भारत के महाशक्तियों और अन्य देशों के साथ संबंध

भारत के महाशक्तियों के साथ सम्बन्ध, 'नेबरहुड फर्स्ट', 'इंडो पैसिफिक डॉक्ट्रिन', आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेन्स' की नीति, छोटे और द्वीपीय देशों के साथ आत्मीय संबंध, अफ्रीका के लिए संवेदनशील नीति, पर्यावरण और संपोषणीय विकास और संघर्षों में शामिल देशों के लिए 'सॉफ्ट पॉवर डिप्लोमेसी' के माध्यम से भारत की छवि अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर एक जिम्मेदार राष्ट्र की बनी है।
• जून 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान विदेश यात्रा। भूटान में 600 मेगावाट जल विद्युत योजना की आधारशिला। भारत सरकार के सहयोग से निर्मित उच्चतम न्यायालय के नए भवन का उद्घाटन।
• जुलाई 2014 को ब्रिक्स के छठे सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। ब्रिक्स का नया विकास बैंक स्थापित करने का निर्णय।
• सितंबर 2014 को ऑस्ट्रेलिया के साथ सिविल न्यूक्लियर डील पर हस्ताक्षर।
• भारत विश्व व्यापार संगठन में इस नीति पर एडिंग रहा कि व्यापार सरलीकरण समझौते पर तब तक हस्ताक्षर नहीं करेगा जब तक सार्वजनिक भंडारण और खाद्य सुरक्षा जैसे बिंदुओं सहित बाली समझौते के सभी बिंदुओं का समाधान नहीं करेगा।
• दिसंबर 2014 में रूस के साथ 20 समझौतों पर हस्ताक्षर। इसमें रूस के सहयोग से भारत में 12 परमाणु संयंत्र स्थापित किए जाएंगे भी शामिल हैं।
• 26 जनवरी 2015 को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति ओबामा विशिष्ट अतिथि बनकर भारत आए। किसी अमरीकी राष्ट्रपति को भारत ने पहली बार ऐसा सम्मान दिया। भारत और अमेरिका के मध्य 6 वर्ष से अटका परमाणु समझौता संपन्न हो गया।
• मार्च 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने सेशल्स, मॉरीशस और श्रीलंका का दौरा किया। इस दौरे का महत्व इस बात से है कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने 34 वर्ष बाद सेशल्स, 10 वर्षों के बाद मॉरीशस और 28 वर्षों के बाद श्रीलंका की यात्रा कि। प्रधानमंत्री ने सेशल्स में भारत के सहयोग से स्थापित किए गए कोस्टल सरवेलेेंंस्र रडार सिस्टम का उद्घाटन किया। मोदी मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस पर मुख्य अतिथि थे। उन्होंने मॉरिशस सरकार को विभिन्न योजनाओं के लिए सस्ती दर पर $500 देने की घोषणा की। समुंद्र की निगरानी करने वाले पोत बाराकुडा का भी उन्होंने वहां उद्घाटन किया। जाफना की भी यात्रा की और तलाईमन्नार में रेलवे का उद्घाटन किया। भारत के सहयोग से जाफना में बनने वाले 27000 घरों के निर्माण का भी प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया।
• प्रधानमंत्री अप्रैल 2015 में फ्रांस, जर्मनी और कनाडा की यात्रा पर रहे। मोदी के फ्रांस पहुंचते ही लड़ाकू विमान राफेल को हरी झंडी मिल गई। विमान निर्माता कंपनी एयरबस ने मेक इन इंडिया प्रोग्राम से प्रभावित होकर भारत में ही अपने विमानों को तैयार करने का वादा किया। 
• बांग्लादेश से भूमि समझौते के अंतर्गत जमीन की अदला बदली हेतु और अप्रैल 2015 में भारतीय संसद में दोनों सदनों की सहमति से संविधान का 100 वां संशोधन अधिनियम पारित किया।
• 15 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के बीच समझौता हुआ जिसके अंतर्गत भारत को 5 वर्ष तक यूरेनियम सप्लाई करेगा। भारत कनाडा के बीच 45 वर्ष बाद नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए कोई समझौता हुआ।
• नवंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन की यात्रा पर रहे। 13 नवंबर को दोनों देशों की कंपनियों के बीच 28 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। ब्रिटिश संसद को संबोधित करने वाले मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री थे।
मोदी के 7 सूत्र - जी-20 में जलवायु परिवर्तन पर मोदी ने 7 सूत्रीय एजेंडा रखा।
1. अक्षय ऊर्जा का शोध व विकास बढ़ ।
2. स्वच्छ ऊर्जा के लिए पैसा व तकनीकी उपलब्ध हो।
3. 2020 तक 100 अरब डॉलर वार्षिक का लक्ष्य हासिल करें।
4. शहरों में परिवहन में 30% की वृद्धि हो।
5. कार्बन क्रेडिट से ग्रीन क्रेडिट की ओर शिफ्ट होना चाहिए।
6. जीवाश्म ईंधन के कम इस्तेमाल के साथ जीवन शैली बदलें।
7. सीपीओ 21 शुरू।
• दिसंबर 2015 को मोदी ने काबुल में भारत के सहयोग से निर्मित संसद भवन का उद्घाटन किया। 26 जनवरी 2016 को फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रहे और 25 जनवरी को भारत फ्रांस के बीच 36 फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल पर समझौता हुआ।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2016 को ईरान की दो दिवसीय यात्रा के दौरान भारत ईरान और अफगानिस्तान के चाबहार बंदरगाह के विकास हेतु एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। चाबहार बंदरगाह के विकास से भारत का माल मध्य एशिया और उससे आगे यूरोप तक पहुंचाया जा सकेगा।
मोदी की स्पेस डिप्लोमेसी - मई 2017 को भारत ने श्री हरिकोटा से दक्षिण एशिया संचार उपग्रह जीसैट 9 को सफलतापूर्वक लांच किया। जीसैट 9 भारत के पड़ोसी देशों के बीच संचार में मददगार होगा। यह उपग्रह 12 वर्ष तक सूचनाएं उपलब्ध कराएगा। आठ में से सात सार्क देश इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है। वस्तुत: इस उपग्रह के माध्यम से भारत का उद्देश्य क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कम करना है। यह प्रधानमंत्री मोदी की 'स्पेस डिप्लोमेसी' है।
• जून 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्ताना (कजाकिस्तान) में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में भाग लिया और भारत 9 जून को संगठन का स्थाई सदस्य बन गया। इससे पहले भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त था।
• मोदी की जुलाई 2017 में तीन दिवसीय इजरायल यात्रा भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन है। इजराइल के 70 वर्ष के अस्तित्व के बावजूद कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री पहली बार इजरायल यात्रा पर गया। जल संरक्षण के लिए करार पर समझौता हस्ताक्षर हुआ।
• न्यूयॉर्क की अपनी यात्रा में मोदी ने फॉर्च्यून कंपनियों के 40 सी ई ओ की मेजबानी की। मोदी ने भारत में कारोबार की संभावनाओं को पूरी ताकत से बताया और ऐसा करते वक्त उन 3D का जिक्र किया जिससे भारत में दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा लाभ हासिल हो सकता है। डेमोक्रेसी (लोकतंत्र), डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसंख्यागत लाभ) और डिमांड (मांग)।
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• मोदी की पड़ोस नीति में 3C को प्राथमिकता दी जाती है। कनेक्टिविटी (संचार), कोऑपरेशन (सहयोग) और कांटेक्ट (संपर्क)। इन देशों को सड़कों, व्यापार, ऊर्जा और जनता के माध्यम से आपस में जोड़ना है।
• आसियान देशों के साथ रिश्तो के लिए भारत ने लुक ईस्ट को ऐक्ट ईस्ट नीति में परिवर्तन कर दिया है।