राममनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohiya) : भारतीय राजनीतिक विचारक

 डॉ. राम मनोहर लोहिया का जीवन परिचय

 Life introduction of Dr. Ram Manohar Lohia
 डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ। राम मनोहर लोहिया भारत के स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर चिंतक तथा समाजवादी नेता रहे हैं। डॉक्टर लोहिया भारत में समाजवादी आंदोलन (Socialist movement) के जनक थे। उन्होंने प्रजा समाजवादी दल (Praja Socialist Party) की स्थापना में प्रमुख योगदान दिया।
राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक विचार, लोकतंत्र पर लोहिया के विचार,
Indian Political Thinker : Ram Manohar Lohia

 डॉ. राम मनोहर लोहिया का राजनीतिक सफर

Political journey of Dr. Ram Manohar Lohia
 लोहिया अपने पिताजी के साथ 1918 में अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार शामिल हुए। 1921 में फैजाबाद किसान आंदोलन के दौरान नेहरू से मुलाकात हुई और 1924 में प्रतिनिधि के रूप में कांग्रेस के गया अधिवेशन में शामिल हुए। अखिल बंग विद्यार्थी परिषद (Akhil Bang Vidyarthi Parishad) के सम्मेलन में सुभाष चंद्र बोस के न पहुंचने पर उन्होंने सम्मेलन की अध्यक्षता की।
 उनके प्रयत्नों के फलस्वरूप सन 1953 में एशियाई समाजवादी सम्मेलन (Asian Socialist Conference) संपन्न हुआ। लोहिया ने अपने डेढ़ गुरु माने थे एक गांधीजी तथा आधा नेहरू को। लोहिया ने 28 दिसंबर 1955 को सोशलिस्ट पार्टी (अखिल भारतीय समाजवादी दल) का गठन किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के पंचमढ़ी अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए समान प्रासंगिकता का सिद्धांत (Principle of equal relevance) दिया। लोहिया ने 'कांग्रेस हटाओ देश बचाओ' का नारा दिया। 1967 के आम चुनाव में एक बड़ा परिवर्तन हुआ, देश के 9 राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें गठित हो गई। डॉक्टर लोहिया इस परिवर्तन के प्रणेता और सूत्रधार बने। राम मनोहर लोहिया ने देश की राजनीति में ग़ैर- कांग्रेसवाद की अवधारणा (Concept of Non-Congressism) को जन्म दिया।
 उन्होंने राइट टू रिकॉल (Right to recall) का समर्थन किया। राम मनोहर लोहिया और जेपी नारायण का कश्मीर बंटवारे के मुद्दे पर मतभेद थे। जेपी नारायण नेहरू की विचारधारा से प्रभावित थे और उनका समर्थन करते थे जबकि लोहिया नेहरू और कांग्रेस की नीतियों से बेहद निराश थे।

• राममनोहर लोहिया के आर्थिक विचार

Economic views of Ram Manohar Lohia
लोहिया ने प्रचलित आर्थिक प्रणालियों का विश्लेषण करते हुए यह संकेत किया है कि विश्व की दो तिहाई आबादी के लिए पूंजीवादी (Capitalist) और साम्यवादी (Communist) दोनों प्रणालियां अनुपयुक्त है। इन दोनों प्रणालियों के अंतर्गत बड़ी-बड़ी मशीनों का प्रयोग और बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है जो आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के केंद्रीकरण को जन्म देता है। इससे व्यक्ति की स्वतंत्रता दब जाती है।
 एशियाई देशों की श्रम शक्ति के पूर्ण उपयोग के लिए छोटी-छोटी मशीनों के प्रयोग और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना जरूरी है। इस तरह लोहिया ने आर्थिक और राजनीतिक विकेंद्रीकरण (Political decentralization) के लिए गांधीवादी ढंग के संगठन का समर्थन किया उन्होंने उद्योग बैंकों तथा बीमा कंपनियों के राष्ट्रीयकरण का विपक्ष लिया।


• डॉ. राममनोहर लोहिया के सामाजिक और राजनीतिक विचार

Social and political views of Dr. Ram Manohar Lohia
लोहिया का मत था कि सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक अधिकारों (राजनीतिक दलों की सदस्यता ग्रहण करने से) वंचित नहीं किया जाए। प्रजातांत्रिक समाजवाद समानता का सिद्धांत है। इसका अर्थ सामाजिक शक्तियों को इस प्रकार व्यवस्थित करना है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उसका उचित अधिकार प्राप्त हो सके। लोहिया ने इसे तात्कालिकता का सिद्धांत (Principle of urgency) कहा।
 जहां गांधी का लक्ष्य राम राज्य की स्थापना करना था वही लोहिया सीता राम राज्य स्थापित करने के इच्छुक थे। उनका विचार था कि समाज में समानता लाने हेतु समान नागरिक संहिता का होना आवश्यक है। लोहिया ने जातिवाद का विरोध करते हुए 'जाति तोड़ो' का नारा दिया। उनका मत था कि भारत में जाति तथा वर्ग दोनों को एक साथ तोड़ने की आवश्यकता है। उसने दलितों, स्त्रियों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा आदिवासियों के लिए सेना, प्रशासन और संसद में 60% आरक्षण की मांग की। इस समय वे 'पहले अवसर फिर योग्यता' का पक्ष लेते थे।

• लोकतंत्र पर लोहिया के विचार

Lohia's views on democracy
लोहिया का लोकतांत्रिक समाजवाद व्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सामाजिक समानता पर आधारित एक ऐसा व्यवहारिक सिद्धांत है जो राजनीतिक व आर्थिक क्षेत्रों में शक्ति के केंद्रीकरण को स्वीकार नहीं करता। वह समाजवादी लक्ष्यों को शांतिपूर्ण प्रजातांत्रिक साधनों से प्राप्त करने का एक उपाय मानते हैं। लोहिया ने व्यस्क मताधिकार पर आधारित विश्व संसद (World parliament) का समर्थन किया। वे चाहते थे कि बोलने की स्वतंत्रता, समुदाय बनाने की स्वतंत्रता तथा निजी जीवन संबंधित स्वतंत्रता के क्षेत्र सुरक्षित होने चाहिए और किसी भी सरकार को बलपूर्वक उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। डॉ लोहिया ने लोकतंत्र की पिरामिडय रचना (Pyramidal design) के स्थान पर सागर तरंग व्यवस्था (Ocean wave system) का समर्थन किया जो गांधी जी की संकल्पना थी। एक व्यक्ति एक वोट के सिद्धांत का उन्होंने समर्थन किया।
लोहिया का प्रजातंत्र समाजवाद से जुड़ा हुआ था। उनके अनुसार प्रजातंत्र समाजवाद के उद्देश्यों को प्राप्त करने का साधन है।

• लोहिया के अनुसार लोकतंत्र के स्तंभ क्या है

What is the pillar of democracy according to Lohia
लोहिया के अनुसार लोकतंत्र, समाजवाद से जुड़ा हुआ था। उनके अनुसार लोकतंत्र, समाजवाद के उद्देश्यों को प्राप्त करने का साधन है। प्रजातंत्र को आम लोगों तक ले जाने के लिए वे सत्ता के विकेंद्रीकरण (Decentralization of power) के पक्ष में थे। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र (parliamentary democracy) के स्थान पर चौखंभा राज्य के सिद्धांत (four pillars state principles) पर आधारित विकेंद्रीकृत व्यवस्था की स्थापना का सुझाव दिया। लोहिया ने लोकतंत्र के चार आधार स्तम्भ माने थे जिसे वे चौखंभा राज्य कहते थे। ये चार आधार स्तम्भ - ग्राम, जिला, प्रांत तथा केंद्र है।

• लोहिया की सप्त क्रांतियां

Seven Revolutions of Lohia
लोहिया ने अपने समाजवाद की पुष्टि करते हुए सात क्रांतियों का सिद्धांत दिया जो निम्न है -
1. निर्धन और धनिक के मध्य अंतर कम करना।
2. कामगारों के लिए समान वेतनमान, समानता के अधिकारों का विस्तार करना।
3. उच्च जाति तथा निम्न जाति के मध्य असमानता की खाई को कम करना।
4. स्त्री पुरुष में समानता स्थापित करना।
5. रंगभेद की समाप्ति।
6. अणु अस्त्रों के विरुद्ध सत्याग्रह।
7. व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए अहस्तक्षेप का सिद्धांत।

• राम मनोहर लोहिया और उनका समाजवाद

Ram Manohar Lohia and his socialism
डॉ राम मनोहर लोहिया विद्रोही प्रवृत्ति के बौद्धिक राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। मार्क्सवाद और गांधीवाद दोनों से प्रभावित थे किंतु दोनों ही विचारधाराओं का अंधानुकरण ना करते हुए उन्होंने एक तीसरा मार्ग खोजा जो समाजवाद के नाम से जाना जाता है। लोहिया का मत था कि एशियाई संदर्भ में पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों ही अनुपयुक्त विचारधाराएं है। उनका लोकतांत्रिक समाजवाद मार्क्सवाद के आर्थिक लक्ष्यों (आर्थिक विकेंद्रीकरण) को गांधीवादी उपायों (राजनीतिक विकेंद्रीकरण) द्वारा प्राप्त करने का एक लक्ष्य है।
 लोहिया स्वतंत्रता पूर्व 1934 में गठित कांग्रेस समाजवादी दल के प्रमुख संस्थापकों में से एक थे, जो प्रमुख संगठन कांग्रेस के अंतर्गत ही कार्यरत था। 1948 में यह कांग्रेस से अलग हो गया कालांतर में यह प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, बाद में सोशलिस्ट पार्टी तथा अंततः समाजवादी पार्टी के रूप में पहचाना गया।

• लोहिया की इतिहास चक्र की संकल्पना

Lohia's concept of history of wheel
लोहिया ने अपनी महत्वपूर्ण कृति इतिहास चक्र (Wheel of History) 1955 के अंतर्गत यह विचार प्रस्तुत किया कि इतिहास तो चक्र की गति से आगे बढ़ता है। इस व्याख्या के अंतर्गत उन्होंने चेतना की भूमिका को मान्यता देते हुए द्वंद्वात्मक पद्धति को एक नई दिशा में विकसित किया जो हिगल और मार्क्स दोनों की व्याख्याओं से अलग थी। लोहिया के अनुसार जाति और वर्ग ऐतिहासिक गति विज्ञान की दो मुख्य शक्तियां हैं। इन दोनों के बीच लगातार खींचतान चलती रहती है और इनमें टकराव से इतिहास आगे बढ़ता है। जाती रूढ़िवादी शक्ति का प्रतीक है जो जड़ता को बढ़ावा देती है और समाज को बंधी बंधाई लीक पर चलने को विवश करती है। दूसरी ओर वर्ग गत्यात्मक शक्ति का प्रतीक है जो सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देती है। आज तक का सारा मानव इतिहास जातियों और वर्गों के निर्माण और विलय की कहानी है। जातियां शिथिल होकर वर्गों में बदल जाती है। वर्ग सुगठित होकर जातियों का रूप धारण कर लेते हैं। लोहिया के अनुसार भारत के इतिहास में दासता का एक लंबा दौर जाति प्रथा का परिणाम था क्योंकि वह भारतीय जन जीवन में सदियों तक भीतर से कमजोर करती रही है।

• लोहिया द्वारा लिखित पुस्तकें

Books written by Lohia
1.इतिहास चक्र (Wheel of History)
2. जंगजू आगे बढ़े
3. क्रांति की तैयारी
4. आजाद राज कैसे बनें ?
5. Will to Power
6. समाजवादी एकता
7. सात क्रांतियां व मार्क्स
8. Language
9. 25000/- प्रतिदिन
10. Ram, Karishna and Shiv
11. Marx, Gandhi and Socialism
12. India, China and Northern frontiers
13. Interval during Politics
14. The Cast System
15. Fragment of World Mind (एशिया की समस्यायों के संबंध में)
16.Lohiya and American Meet (हैरिस वूफोर्ड के संपादकत्व में, लोहिया ने गांधीजी और आइंस्टीन को एक ही श्रेणी का विचारक माना)
17. Guilty Man of India's Partition (मौलाना आजाद की पुस्तक 'india wins freedom' के विरोध में लिखी। इसमें लोहिया ने भारत विभाजन के 8 कारण बताए हैं।)
18. हिंदू बनाम हिंदू (2009)
19. आस्पैक्ट्स ऑफ सोशलिस्ट पॉलिसी,1952 (Aspects of Socialist Policy, 1952)
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