भारतीय संविधान सभा : महत्वपूर्ण तथ्य

भारतीय संविधान सभा Indian Constitution Assembly in hindi


• भारतीय संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा के विचार का औपचारिक रूप से प्रतिपादन भारतीय चिंतक मानवेंद्रनाथ रॉय (Manvendra Nath Roy) द्वारा किया गया था।
• 28 दिसंबर 1936 को फैजपुर अधिवेशन (Faijpur Session) में जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा की मांग को मूर्त रुप दिया।
भारतीय संविधान सभा Indian Constitution Assembly
Indian constitution assembly
• 1937 में कांग्रेस सरकार वाले प्रांतीय विधान मंडलों में संविधान सभा के गठन की मांग के लिए प्रस्ताव पारित किए।
• 1940 के अगस्त प्रस्ताव में प्रथम बार परोक्ष रूप से स्वीकार किया कि भारतीयों को अपना संविधान स्वयं बनाने का अधिकार है।
• 1942 में क्रिप्स योजना (Crips Planning) में पुनः दोहराया गया की कतिपय शर्तों के अधीन भारतीय संघ (Indian Union) की स्थापना के लिए संविधान हेतु संविधान सभा तैयार करें। किंतु तात्कालिक राजनीतिक दलों ने इस योजना को अस्वीकृत कर दिया। महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने इसे "दिवालिया बैंक के नाम उतरतिथिय चैक" कहा।
• 1946 की कैबिनेट मिशन योजना (Cabinet Mission Plan) द्वारा भारतीय संविधान सभा के प्रस्ताव को स्वीकार कर इसे व्यवहारिक रूप प्रदान किया।

 कैबिनेट मिशन योजना 1946

उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री:-- क्लीमेंट एटली।Baritis Prime minister:-- Caliment Atly).
सदस्य:-- सर स्टेफोर्ड क्रिप्स, लार्ड पेथिक लॉरेंस, ए बी एलेग्जेंडर।
उद्देश्य:-- एक ऐसी व्यवस्था करना जिसके द्वारा भारतीय, भारतीयों के लिए संविधान बना सके।
प्रस्ताव:-- १.प्रत्येक प्रांत द्वारा भेजे जाने वाले सदस्यों की संख्या का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर। 10 लाख जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि।
२. प्रत्येक प्रांत की सीटों का तीन प्रमुख समुदायों में विभाजन:-- सामान्य, मुसलमान, सिख। जनसंख्या के अनुपात में
३. देशी रियासतों के सदस्य भी 10 लाख पर एक प्रतिनिधि। सदस्यों का चुनाव का तरीका समझौता समिति के परामर्श पर मनोनयन द्वारा (50%)
• संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या:--389
ब्रिटिश प्रांत:-- 292
कमिश्नर क्षेत्र:--4
देसी रियासत:-- 93
कुल:-- 389

संविधान सभा का चुनाव

 अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा।
• संविधान सभा की प्रथम बैठक:-- 9 दिसंबर 1946
 मुस्लिम लीग (Muslim League) ने भाग नहीं लिया। देशी रियासतों के प्रतिनिधि भी शामिल नहीं हो सके।
• 3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना (Moutobeton Plan) के द्वारा देश विभाजन के बाद संविधान सभा में सदस्य संख्या 324 {235 + 89}।देशी रियासतों के पुनर्गठन के बाद:-- 299 {229 +70}
• 9 दिसंबर 1946 को अस्थाई अध्यक्ष:-- डॉ सच्चिदानंद सिन्हा Dr.Sachhidanand Sinha
11 दिसंबर 1946 को स्थाई अध्यक्ष:-- डॉ राजेंद्र प्रसाद Dr.Rajendra Parshad.
24 जनवरी 1947 को प्रथम उपाध्यक्ष:-- एच सी मुखर्जी H.C.Mukharji.
भारत स्वाधीनता अधिनियम 1947 पारित होने के बाद संविधान सभा एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न संस्था बनी।
• संविधान सभा में अनुसूचित वर्गों के 38 सदस्य थे। दलों में कांग्रेस का वर्चस्व था जिसे 82% प्रतिशत सीटें हासिल थी। महिलाओं की संख्या 12 थी इसमें 9 निर्वाचित थी जो सभी कांग्रेस से संबंधित थी।
ग्रेनविल ऑस्टिन:--"संविधान सभा कांग्रेस थी और कांग्रेस भारत थी।"
13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उद्देश्य प्रस्ताव ही संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना। के एम मुंशी ने उद्देश्य प्रस्ताव को संविधान सभा की जन्मकुंडली कहा।

संविधान सभा द्वारा गठित समितियां

1. प्रक्रिया संबंधी समिति -10
2. विषय संबंधी समिति -17
3. कुल -27
प्रमुख समितियां और उनके अध्यक्ष:--
* नियम, संचालन, वित्त एवं स्टाफ समिति:-- डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद
* संघ शक्ति, संघ संविधान, राज्य समिति:-- जवाहरलाल नेहरू
* प्रांतीय संविधान, परामर्श (वार्ता) समिति:-- सरदार वल्लभ भाई पटेल
* झंडा समिति:-- जे बी कृपलानी
* सर्वोच्च न्यायालय तदर्थ समिति:-- एस वारदा चारियार
* परिचय समिति:-- अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
* गृह समिती:-- पट्टाभि सीतारमैया
* व्यापार समिति:-- के एम मुंशी
* कार्य प्रणाली समिति:-- जी वी मावलंकर
 उप समिति:--
* मूल अधिकार उपसमिति:-- जे बी कृपलानी
* अल्पसंख्यक उपसमिति:-- एच सी मुखर्जी
प्रारूप समिति Draft Committee :-- अध्यक्ष-- डॉ भीमराव अंबेडकर Dr.Bhimrav Ambedkar.
* सदस्य:-- 7
 गोपाल स्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, के एम मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, एन माधवराव (B.L. मित्र के स्थान पर), डी पी खेतान (टीटी कृष्णामाचारी के स्थान पर)
* गठन:-- 29 अगस्त 1947 । 395 धारा 9परिशिष्ट
• संविधान सभा के परामर्शदाता:-- बी एन राव ने संविधान का प्रारूप तैयार किया। सचिवालय की प्रमुख शाखा में तैयार करवाया।
प्रारूप समिति के मूलतः एक मात्र कांग्रेस सदस्य के एम मुंशी थे।

संविधान सभा के सदस्यों का वर्गीकरण

 3 आधार पर।
१.दलीय आधार २.धर्म एवं जातिय आधार ३.व्यक्तित्व का आधार।
• संविधान सभा में राष्ट्रीय आंदोलनों से विरासत में प्राप्त हुए सिद्धांतों को मूर्त रुप दिया जिसका साराशं नेहरू के 1946 में प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव में मिलता है।
संविधान सभा में फैसले आमराय से लिए गए थे और कई प्रावधानों पर निर्णय मत विभाजन करके भी लिए गए। एक प्रावधान जो बिना किसी वाद विवाद के पास हो गया था वह सार्वभौमिक मताधिकार का प्रस्ताव था।


संविधान मे विभिन्न देशों से लिए गए प्रावधान

 60 देशों के संविधान का अध्ययन।
* ब्रिटिश संविधान:-- सरकार का संसदीय रूप, एकल नागरिकता, सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत, कानून के शासन का विचार, विधायिका में अध्यक्ष का पद और भूमिका, कानून निर्माण की विधि।
* अमेरिका संविधान:-- न्यायिक पुनरावलोकन एवं न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों की सूची, उपराष्ट्रपति,
* कनाडा संविधान:-- अर्ध संघात्मक सरकार का स्वरूप (सशक्त केंद्र सरकार वाली संघात्मक), अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धांत,
* फ्रांस संविधान:-- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सिद्धांत ।
* आयरलैंड संविधान:-- राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत।
* जर्मनी संविधान:-- आपातकाल।
* दक्षिण अफ्रीका संविधान:-- संविधान संशोधन प्रक्रिया।
* रूस संविधान:-- मौलिक कर्तव्य।
* जापान संविधान:-- विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।
शांति संविधान:-- जापान (1947) के संविधान को कहा जाता है।
संविधान सभा का गठन का आधार:-सांप्रदायिकता
संविधान के स्त्रोत:-- 1935 का अधिनियम (दो तिहाई), अन्य देशों की संवैधानिक प्रणाली, 1928 की नेहरू रिपोर्ट, प्रथाएँ एवं अभिसमय, न्यायिक निर्णय, टीकाएं एवं विद्वानों के विचार।
• बी एन राव के सुझावों के आधार पर अधिकार दो भागों में:-- वाद योग्य:-- मूल अधिकार (fundamental rights)। अवादयोग्य:-- नीति निर्देशक तत्व। अधिकारों के विभाजन से असहमत और मौलिक अधिकारों में आर्थिक अधिकारों को समाविष्ट करने वाले हृदयनाथ कुंजरू, प्रमोद रंजन ठाकुर, सोमनाथ लाहिड़ी।
संविधान सभा को एक अप्रतिनिधि संस्था मानते हुए लार्ड साइमन ने कहा:-- "यह एक हिंदुओं की संस्था थी।"
विंस्टन चर्चिल ने 'हिंदुओं का संगठन' कहा।
• भारतीय संविधान सभा का एक सदस्य एम आर जयकर भी संविधानसभा को संप्रभु नहीं माना।
• कुछ आलोचकों ने वकीलों का स्वर्ग भी कहां है।
हैदराबाद रियासत के प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित नहीं हुए।
संविधान सभा में अंबेडकर का निर्वाचन पश्चिमी बंगाल से हुआ था।
• संविधान सभा में भारतीय ईसाईयों, एंग्लो इंडियन तथा पारसियों के तीन-तीन प्रतिनिधि शामिल हुए।
भारतीय संविधान सभा की मांग प्रथम बार ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकार की:-- वायसराय की अगस्त 1940 की घोषणा में।

ग्रेनविल ऑस्टिन के अनुसार संविधान सभा में अपनाए गए सिद्धांत

* सर्वसम्मता/ एकमतता का सिद्धांत:-- संघ व्यवस्था, भाषा, संसद, प्रस्तावना संबंधी प्रावधान।
* समायोजन का सिद्धांत:-- संघात्मक व एकात्मक, राष्ट्रमंडल सदस्यता, मूल अधिकार, राष्ट्रपति निर्वाचन, पंचायत व्यवस्था।
* परिवर्तन के साथ चयन का सिद्धांत:-- संविधान संशोधन प्रक्रिया।
• भारत की संसदीय प्रणाली के वेस्टमिनिस्टर मॉडल को अपनाने के लिए अंबेडकर ने प्रयास किया।
• संविधान सभा में तीन वाचन हुए तथा पारित के समय 284 सदस्य उपस्थित थे।
26 नवंबर 1949 को संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी। वर्तमान में 22 भाग एवं 12 अनुसूचियां हैं। कुल अनुच्छेद में से 15 अनुच्छेद को 26 नवंबर 1949 को ही लागू कर दिए थे।
42th constitution amedment द्वारा संविधान की व्यापकता में वृद्धि की गई। 11 नवीन अनुच्छेद और दो नवीन भाग 4 क और 14 क जोड़े गए। प्रस्तावना सहित 53 अनुच्छेदों तथा सातवीं अनुसूची को परिवर्तित किया गया। अतः यह संशोधन भारतीय संविधान का पुनरीक्षण था। इसे लघु संविधान भी कहते हैं।
इंडियन कंस्टीटूशन कॉर्नर स्टोन ऑफ ए नेशन पुस्तक ग्रेनिविल ऑस्टिन द्वारा लिखी गई है।
• मौलिक अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों को सरदार पटेल ने उचित बताया।
संविधान में संपत्ति का अधिकार तथा धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (right to religious freedom) बहुत चर्चित रहा। संपत्ति के अधिकार को व्यक्तिगत एवं सामाजिक हित में संतुलन कायम करने का प्रयास किया। धार्मिक स्वतंत्रता के तहत अनुच्छेद 25(1) द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के अंत:करण की स्वतंत्रता के साथ प्रचार शब्द को समाविष्ट करने का कुछ सदस्यों ने विरोध किया।
• हरि विष्णु कामथ, प्रो. नसीरुद्दीन तथा के टी शाह ने नीति निदेशक तत्वों में निर्देशक के स्थान पर मौलिक शब्द का प्रयोग अनिवार्य बनाने पर बल दिया।
मुस्लिम सदस्य स्विस प्रकार की कार्यपालिका चाहते थे। केंद्रीय प्रांतों तथा विधान सभा के अध्यक्ष जी एस गुप्ते ने अमेरिकन प्रणाली की एकमात्र अनुशंसा की।
एम वी कामथ राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की तुलना जर्मनी के वाइमर Vaimar संविधान से की।
• प्रारूप समिति के अल्पसंख्यकों के लिए स्थान सुरक्षित रखने की सिफारिश का सरदार हुकम सिंह ने विरोध किया।
• शिब्बनलाल सक्सेना एवं मोहम्मद ताहिर द्वितीय सदन को अप्रजातांत्रिक एवं देश की प्रगति में बाधक माना।
• व्यस्क मताधिकार के संबंध में निर्वाचकों की बड़ी संख्या की वृद्धि के कारण मौलाना आजाद इसे 15 वर्षों तक स्थगित करने के पक्ष में थे। राजेंद्र एवं नेहरू इसे तत्काल लागू करने के पक्ष में थे।
• चुनाव में आरक्षण को सरदार पटेल ने राष्ट्रीय एकता (national unity) के विरुद्ध माना है।
संविधान सभा में प्रशासन और संवैधानिक कानून के ज्ञाता:-- अंबेडकर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, NG अयंगर, हृदयनाथ कुंजरू, सच्चिदानंद सिन्हा, के एम मुंशी।
आदर्शवादी व्यक्तित्व वाले राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू।
आलोचक वर्ग:-- के टी शाह, HV कामथ, हृदयनाथ कुंजरू, आचार्य कृपलानी।
• संविधान सभा का गठन ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया।
संविधान सभा में पंचायती राज व्यवस्था का समर्थन गांधीवादी नारायण अग्रवाल Narayan Agarwal ने किया। इस मांग और समर्थन में राज्य नीति निर्देशक तत्वों में artical 40 के अंतर्गत व्यवस्था की।
संविधानवाद :-- जेंम्स ब्राइस
Constitutionalims:--Jems brais.
• भारत के लिए संविधान अनौपचारिक रूप से संविधान तैयार करने का पहला प्रयास 'constitution of india bill' के नाम से 1895 में हुआ था
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