समानता के सिद्धांत Equality theory

समानता के सिद्धांत equality theory : कल्याण की समानता, संसाधनों की समानता, सामर्थ्य की समानता, जटिल समानता का सिद्धांत


कल्याण की समानता का सिद्धांत Equality of Welfare


✓ यह सिद्धांत उपयोगितावादियों (utilitarian) के विचार से जुड़ा है।
✓ कल्याण के दो तरीके:- शास्त्रीय एवं समकालीन

शास्त्रीय:- बेंथम इसे कल्याणकारी सुखवाद (welfare suicidal) को स्वीकार करता है।

• मापदंड - किसी व्यक्ति को दर्द या कष्ट की तुलना में आनंद कितना प्राप्त होता है, कितना सुखी है, कितना सुख प्राप्त है।


समकालीन उपयोगितावाद {कल्याण}:-

• कल्याण को व्यक्ति की इच्छाओं एवं वरीयता संतुष्टि से जोड़ कर देखता है। भले ही संसाधनों की वितरण से समाज में असमानता रहे।

हर व्यक्ति का समान रूप से कल्याण करना उपयोगितावाद का लक्ष्य है।

• यह परिणामवाद की अवधारणा में विश्वास करता है।


Theories of Equality
समानता के सिद्धांत


संसाधनों की समानता का सिद्धांत Equality of resources


समर्थक:- जॉन रॉल्स, रोनाल्डो, ड्वॉर्किन, रोकावोस्की।

• ड्वॉर्किन इस संदर्भ में एक द्विस्तरीय प्रक्रिया के बारे में बताते हैं। 1. महत्वाकांक्षा- संवेदी नीलामी sensory auction 2.बीमा योजना insurance policy

• ड्वॉर्किन के संसाधनों की समानता का सिद्धांत वास्तव में जॉन रॉल्स के वितरणात्मक सिद्धांत की कमियों को दूर करता है और इसके लिए वह इसे 'ईर्ष्या-परीक्षण' नाम देते हैं। उनका यह ईर्ष्या परीक्षण उनकी न्यायपूर्ण वितरण व्यवस्था का आधार है। इस को और अधिक स्पष्ट करने के लिए एक 'नीलामी एवं बीमा योजना'  auction and insurance policy का सहारा लेते हैं। उनका मानना है कि इस नीलामी से सभी लोग खुश होंगे क्योंकि इस निलामी से सभी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की पसंद की वस्तुओं को वरीयता नहीं देंगे और सभी लोग अपनी पसंद की वस्तुओं की बोली लगाएंगे। बीमा योजना नीलामी के पूरक के रूप में काम करती है।ड्वॉर्किन के इस सिद्धांत का मुख्य लक्ष्य किसी व्यक्तिगत प्रभाव (वस्तुओं के वितरण में) को मिटाना है। और उन लोगों को एक सुरक्षा आवरण प्रदान करना है जो प्राकृतिक नुकसानों के शिकार हैं।

√ जॉन रोल्स ने अपनी पुस्तक 'A Theory of Justice ' (1971) में उपयोगितावाद utilitism का एक व्यवस्थित विकल्प प्रस्तुत किया है और अवसरों की समानता (समतावादी सिद्धांत) का प्रतिपादन किया। रॉल्स के इस वितरणवादी सिद्धांत को या यह कहे कि आर्थिक संसाधनों के वितरण संबंधी सिद्धांत भेदमूलक सिद्धांत के नाम से जाना जाता है। जिसका अर्थ है हीनतम स्थिति वाले लोगों को अधिकतम लाभ हो। विल कीमलिका कहते हैं कि रॉल्स की अवसर की समानता (equality of opportunity) को वितरण न्याय कि प्रचलित और सबसे प्रभावशाली विचारधारा मानते हैं। 

Equality of Opportunity
• अवसर की समानता का अर्थ:- किसी भी प्रकार की वंशानुगत तथा विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति ।

• रॉल्स का समानता का सिद्धांत- स्वतंत्रता और समानता में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करता है।

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 सामर्थ्य की समानता का सिद्धांत:अमर्त्य सेन


यह सिद्धांत ड्वॉर्किन के संसाधनों की समानता के सिद्धांत की कमियों को दूर करता है। अमर्त्य सेन (amartya sen) का विचार है कि लोगों को इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि लोगों को कितने संसाधन आवंटित (ड्वॉर्किन) किए जाते, बल्कि इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किस प्रकार के कार्य करने में समर्थ हैं। सेन का विचार है कि असमानता का विश्लेषण करते समय विविधता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सेन अपने विचार को मनुष्य की क्रियाशीलता के रुप में देखना चाहते हैं अर्थात किसी भी प्रकार की स्थिति में रहने वाला व्यक्ति किसी कार्य को करने में कहां तक समर्थ है। वे कार्यशीलता कि स्वतंत्रता को वास्तविक स्वतंत्रता मानते हैं।
 सामर्थ्य एक निश्चित तरह के कार्य को करने की क्षमता है। साक्षरता एक सामर्थ्य है और पढ़ना एक कार्य है। बाहरी संसाधन उपलब्ध कराने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ावा दिया जाए।

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 जटिल समानता का सिद्धांत Theory of complex equality : वाल्जर



वाल्जर ने अपनी पुस्तक 'स्पीयर्स ऑफ जस्टिस' (1983) में समानता के इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया। उपरोक्त सभी सिद्धांतों के सरल समानता को अस्वीकार करते हुए जटिल समानता को महत्वपूर्ण बताया।


 सकारात्मक कार्यवाई positive action (संंरक्षणात्मक विभेदीकरण) का सिद्धांत


• इसे  संरक्षणात्मक विभेदीकरण का सिद्धांत भी कहा जाता है। यह अवसरों की समानता सुनिश्चित करने का एक तरीका है। हमारे देश में इसे आरक्षण नीति के रूप में अपनाया गया है। असमानताओं को मिटाने के लिए सकारात्मक कार्यवाई की अधिकतर नीतियां अतीत की असमानताओं के संचय दुष्प्रभावों को दुरुस्त करने के लिए बनाई जाती है। सकारात्मक कार्यवाई के रूप में विशेष सहायता को एक निश्चित समय अवधि तक चलने वाला तदर्थ उपाय माना गया है।

 इस प्रकार के विशेष (विभेदक) बरताव का उद्देश्य और औचित्य एक न्यायपरक और समतामूलक समाज को बढ़ावा देने के माध्यम के अलावा कुछ और नहीं है।

 यह एक परिणामवादी विचार है। अलग-अलग विचार को ने इसे अलग अलग नाम दिया है।

संरक्षणात्मक भेदभाव protective discrimination :- एलेक्जेण्डरो विच।

• विलोम भेदभाव:- मार्क लेकेण्डर।

• सकारात्मक भेदभाव Positive Discrimination :- सी एल आनंद।

• आरक्षण :- भारत में।

Equality theory, equality of  opportunity
समानता के सिद्धांत Equality theory समानता के सिद्धांत Equality theory Reviewed by Mahender Kumar on फ़रवरी 20, 2018 Rating: 5

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